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May 3, 2020

पत्रकार अमीश देवगन को ओवैसी के पार्षद मुर्तजा ने दी धमकी, पुलिस के साथ कर चुका है बदसलूकी

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मुर्तजा ने अमीश को 'सोशल मीडिया का गुंडा' बताते हुए सलाह दी कि वो एंकर बन कर बात करें। जब अमीश ने पूछा कि उन्होंने पुलिसकर्मी के गिरेबान और हाथ पकड़ने की कोशिश क्यों की तो उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी में गुंडागर्दी वाला कोई कॉन्सेप्ट ही नहीं है। जब अमीश ने अकबरुद्दीन ओवैसी के '15 मिनट के लिए पुलिस हटा दो'.......

पत्रकार अमीश देवगन को असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के पार्षद मुर्तजा ने धमकी दी है। अमीश ने उनसे सवाल पूछे थे, इसीलिए गुस्से में AIMIM के नेता ने ‘न्यूज़ 18’ के पत्रकार अमीश देवगन को धमकाया। अमीश ने जब उनसे पूछा कि उन्होंने पुलिस के साथ बदसलूकी क्यों की और ऐसा क्यों कहा कि पहले मंदिर को बंद कराओ, मस्जिद को नहीं- तो पार्षद ने कहा कि आप गुंडागर्दी की बाद करेंगे तो मैं भी यही बात करूँगा।

मुर्तजा ने अमीश को ‘सोशल मीडिया का गुंडा’ बताते हुए सलाह दी कि वो एंकर बन कर बात करें। जब अमीश ने पूछा कि उन्होंने पुलिसकर्मी के गिरेबान और हाथ पकड़ने की कोशिश क्यों की तो उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी में गुंडागर्दी वाला कोई कॉन्सेप्ट ही नहीं है। जब अमीश ने अकबरुद्दीन ओवैसी के ’15 मिनट के लिए पुलिस हटा दो’ वाले बयान की याद दिलाई तो उन्होंने कहा कि वो उनसे सिर्फ़ उनके बारे में सवाल करें।
आज सुबह से मेरे पास कई अलग अलग फ़ोन नम्बर से फ़ोन आ रहें हैं ख़ास कर के मिडल ईस्ट से अपने अकाओं को कहदो न ड़रे हैं न डरेंगे । भारत के लिये आख़िरी दम तक बोलेंगे ।
जय हिन्द


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बाद में वो कहने लगे कि पुलिसकर्मी ने नेमप्लेट छिपाया। मोहम्मद मुर्तजा अली कहने लगे कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी तो लॉकडाउन के बाद पूजा की। मोहम्मद मुर्तजा ने अपनी गलती मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वो माफ़ी भी नहीं माँगेंगे क्योंकि पुलिस वाले ने ग़लती की है। अब इस सवाल पूछने के कारण अमीश को अलग-अलग नंबरों से कॉल आ रहे हैं। शो के दौरान ही मुर्तजा बार-देवगन का नाम पूछते रहे।


उन्होंने धमकाया कि आपको पता नहीं है क्या आप किससे बात कर रहे हैं, आप अपने जुबान को लगाम दीजिए। उन्होंने धमकाने के अंदाज में नाम पूछा और धमकी दी। अमीश को इसके बाद कई नंबरों से कॉल आए हैं और उन्हें धमकी दी जा रही है। हालाँकि, उन्होंने कहा है कि वो किसी ने नहीं डरेंगे और सच के लिए आवाज़ उठाते रहेंगे। भाजपा नेता अमित मालवीय ने भी अमीश को धमकी दिए जाने की निंदा की है।
Y'day, @amishdevgan, a popular, forthright anchor with News 18, committed to the idea of nation first, questioned an AIMIM corporator, who assaulted a cop, enforcing lockdown in Hyderabad. Since then he has been getting threat calls.
Amish should know that India stands with him!

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बता दें कि मुर्तजा अली का एक वायरल वीडियो में बृहस्पतिवार (अप्रैल 30, 2020) को हैदराबाद के चवन्नी नदी अली बेग में एक मस्जिद के पास अपनी ड्यूटी कर रहे दो कॉन्स्टेबल को धमकाने और ड्यूटी में बाधा डालते हुए देखा गया था। ओवैसी की ही पार्टी का वारिस पठान पहले से ही दिल्ली दंगों के मामले में कई भड़काऊ बयान देने के कारण आरोपित है।


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April 27, 2020

दिल्ली- हिन्दू विरोधी दंगे की मुख्य साजिशकर्ता सफूरा जरगर है प्रेग्नेंट, जेल में डालने पर लिबरल गिरोह कूट रहा छाती


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आज जब आरोपित महिला के ऊपर लगे आरोप इतने संगीन है उस समय उसके लिए रिपोर्ट में 'छात्र' और 'स्कॉलर' शब्द का प्रयोग हो रहा है। व उसके प्रोफेसर उसे उसके अपराधों से निजात दिलाने के लिए उसके अकादमिक रिकॉर्ड का हवाला दे रहे हैं। उस समय सोचने वाली बात है कि सफूरा के लिए जो उसकी प्रेगनेंसी के नाम पर ट्रेंड चलाया जा रहा है उसमें उसके 3 महीने से प्रेग्नेंट होने की बात हैं, जबकि दिल्ली में हुई हिंसा 2 महीने पुरानी घटना है।

दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों में कट्टरपंथी समूह PFI का नाम सामने आने के बाद पुलिस ने जामिया के 2 छात्रों को इस संबंध में गिरफ्तार किया। एक नाम मीरान हैदर और दूसरा प्रेग्नेंट सफूरा जरगर (Safoora Zargar)। दोनों पर उत्तरपूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा भड़काने की साजिश रचने का आरोप है। जिसके कारण इनके खिलाफ़ गैरकानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया गया है। हालाँकि, हैदर की गिरफ्तारी को लेकर अप्रैल माह के शुरूआत में खूब सवाल उठाए गए थे। लेकिन संगीन आरोपों के कारण ये आवाज हल्की पड़ गई। इसके बाद सफूरा की गिरफ्तारी पर कट्टरपंथियों ने आवाज बुलंद की और दिल्ली पुलिस का क्रूर चेहरा दर्शाने के लिए उसकी प्रेग्नेंसी को लेकर बवाल खड़ा कर दिया।

सफूरा के लिए अलजजीरा की मार्मिक रिपोर्टिंग
हिंदुओं पर अक्सर आक्रामक रिपोर्टिंग करने वाला अलजजीरा जैसे मीडिया संस्थान ने इस एंगल को लेकर बेहद मार्मिक रिपोर्ट पेश की। अपनी रिपोर्ट में अलजजीरा ने लिखा कि 27 वर्षीय गर्भवती (प्रेग्नेंट) महिला सफूरा जरगर को 10 अप्रैल को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया और उसपर साजिशकर्ता होने का आरोप लगाया। 

इसके अलावा उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कुछ अन्य बातों का भी उल्लेख किया जैसे जामिया कॉर्डिनेशन कमेटी के बयान को, जिसमें उन्होंने सीएए को मुस्लिम विरोधी बिल बताया और जरगर के परिजनों के बयान को भी शामिल किया जिसमें उन्होंने कहा कि रमजान का पहला दिन सफूरा के बिन बहुत दुख में बीता।


इतना ही नहीं, रिपोर्ट में तिहाड़ के हालातों का भी उल्लेख किया गया कि और बताया गया है कि तिहाड़ जेल का परिसर भारत की सबसे भीड़भाड़ वाली जेलों में से एक है जिसमें लगभग दोगुने कैदी बंद हो सकते हैं।  

सोशल मीडिया पर सफूरा के समर्थन में कट्टरपंथी व सेकुलरों की माँग
अब अलजजीरा की इस रिपोर्ट के बाद अगले चरण में मीडिया गिरोह के लोगों ने अपना काम करना शुरू किया। ये रिपोर्ट तेजी से शेयर की जाने लगी और सबा नकवी जैसे लोग ये सवाल करने लगे कि लोकतंत्र सीएए के खिलाफ प्रदर्शन का अधिकार देता है। तो एक प्रेग्नेंट महिला को एंटी टेरर चार्ज के नाम पर लॉकडाउन और महामारी के बीच क्यों गिरफ्तार किया गया? उसका बच्चा क्या जेल में पैदा होगा?

कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय संयोजक हसीबा आमीन ने लिखा, “27 वर्षीय जामिया की स्कॉलर ने, जो कि 3 माह की गर्भवती है, उसने अपने रमजान का पहला दिन तिहाड़ जेल में बिताया। क्यो? क्योंकि उसने सरकार द्वारा किए जा रहे गलत कामों के ख़िलाफ़ बोलने की हिम्मत दिखाई।”


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इसके बाद सीएनएन की पत्रकार जेबा वारसी ने लिखा कि ये जामिया की मीडिया कॉर्डिनेटर है और ये जामिया के बाहर हुए शार्तिपूर्ण प्रोटेस्ट में शामिल थी। ये गर्भवती हैं। अलजजीरा की रिपोर्ट कहती है कि इसे तिहाड़ में एकांत में रखा गया है।


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इसी तरह अलजजीरा की इस खबर को दलित विरोधी इरेना अकबर समेत कई लोगों ने सोशल मीडिया पर शेयर किया और एक माहौल बनाने की कोशिश की, कि क्योंकि जामिया की छात्र नेता सफूरा जरगर 3 महीने की गर्भवती हैं। इसलिए उस समय में जब उन्हें उचित देखभाल और चिकित्सकीय देख-रेख की आवश्यकता है। तब उन्हें गिरफ्तार किया गया है और तिहाड़ में अकेले रखा गया है। कुछ लोगों ने तो सोशल मीडिया पर इस खबर के आधार पर मानवता के मरने का दावा भी किया है। कुछ ने कपिल मिश्रा के ख़िलाफ़ कार्रवाई की माँग की है।

अब हालाँकि, किसी भी महिला से संबंधित ऐसी खबर सुनकर किसी का भी दिल पसीज जाना आम बात है। लेकिन दिल्ली पुलिस पर सवाल उठाने से पहले, केंद्र सरकार को कोसने से पहले ये भी जानने की आवश्यकता है कि आरोपित महिला पर कैसे इल्जाम लगे हैं और मात्र प्रेगनेंसी का हवाला देकर उसपर लगे आरोपों को खारिज नहीं किया जा सकता और न ही इस बात से मुँह फेरा जा सकता है कि मीडिया गिरोह कैसे इस पूरे मामले को अलग कोण दे रहा है।

विचार करिए! आज जब आरोपित महिला के ऊपर लगे आरोप इतने संगीन है उस समय उसके लिए रिपोर्ट में ‘छात्र’ और ‘स्कॉलर’ शब्द का प्रयोग हो रहा है। व उसके प्रोफेसर उसे उसके अपराधों से निजात दिलाने के लिए उसके अकादमिक रिकॉर्ड का हवाला दे रहे हैं। उस समय सोचने वाली बात है कि सफूरा के लिए जो उसकी प्रेगनेंसी के नाम पर ट्रेंड चलाया जा रहा है उसमें उसके 3 महीने से प्रेग्नेंट होने की बात हैं, जबकि दिल्ली में हुई हिंसा 2 महीने पुरानी घटना है।


आज अगर वाकई ही इस एंगल से किसी के अपराध पर होने वाली कार्रवाई पर इतना फर्क पड़ता है, तो क्या जरूरत थी प्रेगनेंसी के दौरान सड़कों पर आने की, आंदोलनों में अपनी सक्रियता दिखाने की? अगर आज इस आधार पर सफूरा के लिए दया माँगी जाती है, उनकी जाँच को रोका जाता है, तो कल को क्या हर अपराधी महिला या अपराध करने के इल्जाम में गिरफ्तार हुई महिला प्रेगनेंसी के नाम पर अपने लिए छूट नहीं माँगेगी?

लोकतंत्र की बातें करने वाले ही ये बताएँ कि किस किताब में लिखा है कि गर्भवती होने के बाद लोगों को भड़काओ और जब पकड़े जाओ तो विक्टिम कार्ड खेल लो? आज सोशल मीडिया पर गिरोह का दोहरापन देखकर ऐसे तमाम सवाल तैर रहे हैं। लेकिन अलजजीरा की तर्ज पर अन्य मीडिया संस्थान इस एंगल से रिपोर्ट पेश करके इसे और मार्मिक रूप देने में लगे हैं और ये बता रहे हैं कि उसे सफूरा को क्वारंटाइन के नाम पर कैसे अलग रख कर परेशान किया जा रहा है। जबकि सच क्या है? ये किसी से छिपा नहीं हैं।

ज्ञात रहे कि दिल्ली में हुई हिंदू विरोधी हिंसा में मीरान हैदर के साथ सफूरा जरगर को साजिश करने के आरोप में आरोपित बनाया गया है। जिसमें उस समय 50 से ज्यादा निर्दोष लोगों की लाशें गिरी थीं और राष्ट्रीय राजधानी ने 1984 में सिखों नरसंहार के बाद मुख्य रूप से हिंदुओं को निशाना बनते देखा था। जिसमें दिलबर नेगी के हाथ-पाँव काटकर नृशंस हत्या की वारदात को अंजाम दिया गया था और आईबी के अंकित शर्मा को सुनियोजित ढंग से मारा गया था।

साभार -ऑपइंडिया
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इंडिया टुडे ने फिर POK के बिना दिखाया भारत का नक्शा


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इंडिया टुडे विकृत तथ्यों और गलत सूचनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए पहले से ही बदनाम रहा है। अब एक वायरल वीडियो में राजदीप सरदेसाई अपने शो की मेजबानी करते दिखाई पड़ रहे हैं। इसमें भारत का गलत नक्शा प्रदर्शित किया गया है।


सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में राजदीप सरदेसाई इंडिया टुडे पर अपने प्राइम टाइम शो की मेजबानी करते हुए देखे जा सकते हैं। इसमें भारत का गलत नक्शा प्रदर्शित किया गया है। वीडियो में एक ग्राफिकल प्रस्तुति में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) के बिना भारतीय मानचित्र को दर्शाया गया है।

इतना ही नहीं पाकिस्तान के नक्शे में कश्मीर के भारतीय क्षेत्र को शामिल करके दिखाया गया है। यह ठीक उसी तरह है जैसे पाकिस्तान की सरकार अपने आधिकारिक नक्शे में प्रस्तुत करती है।
Archbishop @aroonpurie's channel showed POK in Pakistan on a map shown during Congress IT cell member @sardesairajdeep's show

Hope Home Minister @AmitShah takes note of it

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गौर से देखने पर पाकिस्तान के विभिन्न नक्शों के बीच दिखाई देने वाले अंतर इस तथ्य की पुष्टि करते हैं कि इंडिया टुडे ने पाकिस्तान के नक्शे में जम्मू और कश्मीर का क्षेत्र शामिल कर दिया है।

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आपको बता दें कि वर्ष 2016 में केंद्र सरकार द्वारा भू-स्थानिक सूचना विनियमन विधेयक के तहत एक नया कानून प्रस्तावित किया गया था। इसमें POK या अरुणाचल प्रदेश के बिना भारतीय मानचित्र को दर्शाने पर 100 करोड़ के जुर्माने के साथ 7 साल की जेल की सजा भी हो सकती है। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम के 69(ए) के तहत ऐसी वेबसाइटों को भारत सरकार द्वारा ब्लॉक किया जा सकता है।

गौरतलब है कि इंडिया टुडे विकृत तथ्यों और गलत सूचनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए पहले से ही बदनाम रहा है। इससे पहले चैनल के प्रबंध संपादक राहुल कंवल ने भी एक इन्फोग्राफिक रखा था, जिसमें कोरोना से भारत के सबसे अधिक प्रभावित 12 राज्यों के अस्पतालों में उपलब्ध पीपीई किटों की संख्या को सूचीबद्ध कर दिखाया गया था। कंवल के मुताबिक महाराष्ट्र में पीपीई किटों की अधिकतम संख्या 1,22,133 थी, जबकि सबसे कम तेलंगाना में पीपीई किटों की संख्या 3,132 थी।

उसी पर प्रतिक्रिया देते हुए तेलंगाना के मंत्री केटीआर ने इंडिया टुडे और राहुल कंवल को उनकी गलत रिपोर्टिंग के लिए लताड़ा था। एक ट्वीट में केटीआर ने राहुल कंवल से कहा था कि अगर आपके पास सही जानकारी नहीं है तो इस संकट के समय में ‘बकवास और भ्रमित करने वाला डेटा’ प्रकाशित न करें।

केटी रामराव ने कहा कि क्या इंडिया टुडे और राहुल कंवल माफी मांगेंगे, अगर उन्होंने साबित किया कि तेलंगाना के पास इंडिया टुडे द्वारा पेश किए गए आँकड़ों से 100 गुना ज्यादा पीपीई किट हैं। तेलंगाना के मंत्री ने आगे ट्वीट में लिखा था, “क्षमा करें, लेकिन यह अपमानजनक पत्रकारिता है राजदीप सरदेसाई।”

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Vigyapan