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May 3, 2020

पश्चिम बंगाल-153 क्रूड बम बरामद, तृणमूल कॉन्ग्रेस समर्थक शेख कासमुद्दीन पश्चिम बंगाल में मिदनापुर से गिरफ्तार

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आस-पास के निवासियों में दहशत की स्थिति। स्थानीय लोगों ने पुलिस से सवाल किया है कि इतनी बड़ी मात्रा में कच्चे बमों को कैसे जमा किया गया। कोरोनो वायरस लॉकडाउन के बीच 153 क्रूड बमों की बरामदगी को लेकर पुलिस भी असमंजस की स्थिति में है।

पश्चिम बंगाल में पूर्वी मिदनापुर जिले के लालपुर गाँव में शेख कासमुद्दीन नामक एक स्थानीय निवासी और तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) समर्थक के घर के पीछे से 153 क्रूड बम बरामद किया गया। भगवानपुर पुलिस ने बमों की बरामदगी के साथ ही इस मामले के सिलसिले में चार लोगों को भी गिरफ्तार किया। इसके बाद तीन को प्रारंभिक पूछताछ के बाद रिहा कर दिया गया और कासमुद्दीन को कांथी कोर्ट में पेश किया गया। उसे न्यायाधीश ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। उसके घर के पीछे से जो कच्चे बम बरामद किए गए थे, उन्हें भी डिफ्यूज कर दिया गया है।

एगरा के उप-विभागीय पुलिस अधिकारी शेख अख्तर अली ने कहा, “अवैध रूप से जमा किए गए बम बरामद हुए थे और इसमें एक व्यक्ति को गिरफ्तार भी किया गया है। हम आरोपितों से इन कच्चे बमों को जमा करने के पीछे के मकसद के बारे में पूछताछ कर रहे हैं।”

इस घटना ने लालपुर गाँव के निवासियों में दहशत की स्थिति पैदा कर दी है। स्थानीय लोगों ने पुलिस से सवाल किया है कि इतनी बड़ी मात्रा में कच्चे बमों को कैसे उनकी निगरानी में जमा किया गया। कोरोनो वायरस लॉकडाउन के बीच 153 क्रूड बमों की बरामदगी को लेकर पुलिस भी असमंजस की स्थिति में है।

तृणमूल कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं में आपस में झड़प
भगवानपुर ब्लॉक में तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यवाहक सहायक सचिव और भगवानपुर-1 पंचायत समिति के सदस्य हारुन रशीद (बाबूलाल) के समर्थकों के बीच हुए झड़प के बाद क्षेत्र में पुलिस सक्रिय हो गई है। जानकारी के मुताबिक आरोपी शेख कासमुद्दीन इलाके में हारुन रशीद का समर्थक माना जाता है। रिपोर्टों के अनुसार, 11 अप्रैल को दो समूहों के बीच हिंसक लड़ाई हुई, जिसके बाद अजीमुल और अन्य 44 लोगों को गिरफ्तार किया गया। साथ ही झगड़ा रोकने के लिए उन्हें जिला नेतृत्व और ब्लॉक नेतृत्व की तरफ से चेतावनी भी दी गई थी।

भगवानपुर -1 ब्लॉक के तृणमूल अध्यक्ष मदन मोहन पात्रा ने कहा, “पार्टी की ओर से बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद उन्होंने बात नहीं मानी। वे सत्ता के लिए लड़ रहे थे और अशांति पैदा करने के लिए वे बमों को जमा भी कर रहे थे। पुलिस को कानून के अनुसार उनके खिलाफ़ कार्रवाई करने के लिए कहा गया है।”

अवैध आतिशबाजी कारखाने में विस्फोट
गौरतलब है कि इस साल जनवरी में, पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के नैहाटी में एक अवैध पटाखा निर्माण कारखाने में हुए विस्फोट में कम से कम चार लोग मारे गए थे और एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया था। तब फैक्ट्री का मालिक नूर हुसैन को गिरफ्तार किया गया था और उसके खिलाफ हत्या के साथ-साथ अन्य धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

विस्फोट की तीव्रता को देखते हुए तब स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया था कि अवैध पटाखे के कारखाने का उपयोग कच्चे बम बनाने के लिए किया जाता था।
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May 2, 2020

दिल्ली-ताहिर हुसैन को कोर्ट से झटका, जमानत याचिका खारिज: दिल्ली दंगो और अंकित शर्मा हत्या का है आरोपित

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अपनी जमानत याचिका में ताहिर हुसैन ने कहा था कि वो निर्दोष है। दिल्ली हिंसा में उसका हाथ नहीं है और पुलिस के पास उसके खिलाफ कोई ठोस सबूत भी नहीं हैं। पुलिस उसे गलत तरीके से फँसा रही है। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने ताहिर हुसैन के खिलाफ कठोर अवैध गतिविधियाँ अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया है।

दिल्ली हिंदू विरोधी हिंसा के मामले में आरोपित और आम आदमी पार्टी से निष्कासित पूर्व निगम पार्षद ताहिर हुसैन की जमानत याचिका को दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट ने शनिवार को खारिज कर दिया है। इसके बाद अब ताहिर हुसैन को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। दरअसल ताहिर हुसैन को दिल्ली पुलिस ने आईबी अंकित शर्मा की हत्या और दिल्ली हिंसा में संलिप्तता के चलते गिरफ्तार किया गया था।
A Delhi Court rejects the bail plea of Tahir Hussain, who is an accused in a case related to violence in North-East Delhi in February 2020. (File pic)
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दरअसल, अपनी जमानत याचिका में ताहिर हुसैन ने कहा था कि वो निर्दोष है। दिल्ली हिंसा में उसका हाथ नहीं है और पुलिस के पास उसके खिलाफ कोई ठोस सबूत भी नहीं हैं। पुलिस उसे गलत तरीके से फँसा रही है। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने ताहिर हुसैन के खिलाफ कठोर अवैध गतिविधियाँ अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया है।

आपको बता दें कि ताहिर हुसैन पर आइबी कॉन्स्टेबल अंकित शर्मा की हत्या में शामिल होने के साथ-साथ, दिल्ली में हिंसा भड़काने, साजिश रचने समेत कई अन्य मामले दर्ज किए गए हैं। इससे पहले ताहिर हुसैन को दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हिंसा मामले में 5 मार्च को गिरफ्तार किया था। दरअसल ताहिर हुसैन अपने वकील के साथ राऊज एवेन्यू कोर्ट में मुँह पर मास्क लगाए सरेंडर करने के लिए पहुँचा था, लेकिन पहले से वहाँ मौजूद दिल्ली पुलिस के विशेष जाँच दल ने गिरफ्तार कर लिया था।

चश्मदीदों के अनुसार, उसकी इमारत में करीब तीन हजार दंगाई जमा थे। वहॉं से हिंदुओं को निशाना बना पत्थरबाजी हुई। पेट्रोल बम फेंके गए। गोलियॉं चलाई गई। उसकी इमारत से पत्थरों और पेट्रोल बम का जखीरा बरामद किया गया था। शुरुआत में आम आदमी पार्टी ने उसका बचाव करने की कोशिश की, लेकिन, जब एक के बाद एक सबूत सामने आते गए तो निलंबित कर आम आदमी पार्टी ने उससे पल्ला झाड़ने की कोशिश की।
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उल्लेखनीय है कि सीएए, एनआरसी विरोध के नाम पर 23-24 फरवरी को दिल्ली में शुरू हुई हिंदू विरोधी हिंसा में 53 लोगों ने अपनी जान गँवा दी थी। इस हिंसा में 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस दौरान दंगाइयों ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद, मौजपुर, बाबरपुर, घोंडा, चांदबाग, शिव विहार, भजनपुरा, यमुना विहार इलाकों में सरकारी और निजी संपत्ति को भी काफी नुकसान पहुँचाया था।

हिंसक भीड़ ने मकानों, दुकानों, वाहनों, एक पेट्रोल पम्प को फूँक दिया था और स्थानीय लोगों तथा पुलिस कर्मियों पर पथराव किया था। इस हिंसा मे राजस्थान के सीकर के रहने वाले दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल रतन लाल की गोली लगने से मौत हो गई थी और डीसीपी और एसीपी सहित कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। वहीं आईबी में कार्यरत अंकित शर्मा की हत्या करने के बाद उनकी लाश को नाले में फेंक दिया गया था।

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ED ने महाराष्ट्र के डिप्टी CM अजित पवार खिलाफ दर्ज किया मामला

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ED ने नागपुर में VIDC (विदर्भ सिंचाई विकास निगम) से संबंधित सिंचाई घोटाले में एक एन्फोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट दर्ज की है। साथ ही संदिग्ध अनियमितताओं को लेकर मनी-लॉन्ड्रिंग की जाँच शुरू कर दी है। ये जाँच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रही है।

महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री (डिप्टी CM) व NCP नेता अजित पवार की मुश्किलें सिंचाई घोटाले को लेकर एक बार फिर बढ़ गई हैं। इस बार, ED ने नागपुर में VIDC (विदर्भ सिंचाई विकास निगम) से संबंधित सिंचाई घोटाले में एक एन्फोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट दर्ज की है। साथ ही संदिग्ध अनियमितताओं को लेकर मनी-लॉन्ड्रिंग की जाँच शुरू कर दी है। ये जाँच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रही है।

ख़बर आई थी कि एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के भतीजे अजित पवार को सिंचाई घोटाले में क्लीनचिट मिल गई है। यह घोटाला अजित के महाराष्ट्र के जल संसाधन मंत्री रहते हुआ था। 27 नवंबर को कहा गया था कि एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने बॉम्बे हाई कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर अजित पर लगे सारे आरोप वापस ले लिए हैं। हलफनामा दाखिल होने वाली ख़बर से एक दिन पहले ही भाजपा के देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था। अजित पवार के उप मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर वापस एनसीपी में लौट जाने पर फडणवीस ने अपना पद छोड़ा था।

गौरतलब है कि साल 1999 से 2009 तक जल संसाधन मंत्री रहे अजित पवार के ख़िलाफ़ ये हलफनामा कई आरोपों से जुड़ा हुआ है। इसमें विदर्भ में शुरू हुई 32 सिंचाई परियोजनाओं का मामला भी शामिल है, जिनकी लागत 3 महीनों के भीतर 17,700 करोड़ रुपए तक बढ़ गई थी। साथ ही मनी लॉन्ड्रिंग का मामला भी है।

आपको बता दे कॉन्ग्रेस और एनसीपी गठबंधन में अजीत पवार 1999-2009 उपमुख्यमंत्री रहे थे। इसी दौरान प्रमुख विभागों के बीच जल संसाधन विकास विभाग भी संभाला था। जिसमें विदर्भ सिंचाई विकास निगम के अध्यक्ष पद पर थे। बाद में इस पर कथित रूप से 35,000 करोड़ रुपये की अनियमितता बरतने का आरोप लगा। सूत्रों के अनुसार अब ED की नागपुर यूनिट ने भंडारा जिले में गोसीखुर्द परियोजना की जाँच शुरू कर दी है। इसकी जाँच एसीबी द्वारा दर्ज मामलों पर आधारित है।

भाजपा नेता किरीट सोमैया ने इस पर कहा कि महाराष्ट्र सिंचाई घोटाले पर ED द्वारा आज (2 मई 2020) पंजीकृत 2 ECIR / शिकायतों का मैं स्वागत करता हूँ। मुझे यकीन है कि वे भ्रष्ट आचरण, मनी लॉन्ड्रिंग आदि पर गहराई से जाएँगे और वास्तविक लाभार्थियों को भी ढूँढेंगे।
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सहारनपुर-मस्जिद में हो रही थी सामूहिक नमाज, पुलिस पहुँची तो उठ कर भागे नमाजी, 15 गिरफ्तार, 30 के खिलाफ FIR

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पुलिस ने मस्जिद से एहसान, शेरदिल, फरमान, शाकिर, परवेज, यामीन, हम्माद, इसराइल, सद्दाम, दिलशाद, मरगूब, सलमान, जरीफ, साबिर व आलिम को मौके से गिरफ्तार किया है, हालाँकि कुछ लोग मौके से भाग जाने में सफल रहे। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 30 लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।

उत्तर प्रदेश के जिला सहारनपुर की एक मस्जिद में कुछ लोग सामूहिक नमाज अदा करने के लिए पहुँच गए। सूचना पर पहुँची पुलिस को देख नमाजियों में भगदड़ मच गई। पुलिस ने मौके से 15 नमाजियों को गिरफ्तार किया है, साथ ही 30 लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
सहारनपुर में लॉकडाउन के बावजूद मस्जिद में नमाज अदा कर रहे थे लोग, 15 लोगो को सहारनपुर पुलिस ने किया गिरफ्तार

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जानकारी के मुताबिक जिला सहारनपुर क्षेत्र के गाँव उमाही कला की जकरिया मस्जिद में शुक्रवार (मई 1, 2020) को बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करते हुए नमाज अदा करने के लिए इकट्ठा हो गए और सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियाँ उड़ाते हुए सामूहिक रूप से नमाज अदा करने लगे।

इस बात की जानकारी जैसे ही पुलिस को हुई वह तत्काल टीम के साथ मौके पर पहुँच गई। पुलिस को देख मस्जिद में नमाज अदा कर रहे लोगों के बीच भगदड़ मच गई। इस दौरान पुलिस ने सक्रीयता दिखाते हुए 15 लोगों को मौके से गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने मस्जिद से एहसान, शेरदिल, फरमान, शाकिर, परवेज, यामीन, हम्माद, इसराइल, सद्दाम, दिलशाद, मरगूब, सलमान, जरीफ, साबिर व आलिम को मौके से गिरफ्तार किया है, हालाँकि कुछ लोग मौके से भाग जाने में सफल रहे। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 15 नामजद और 15 अज्ञात मिलाकर 30 लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।

पुलिस अधिकारियों ने माहौल को देखते हुए गाँव में पीएसी बल तैनात कर दिया है। थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह ने बताया कि 15 नामजद, जबकि 15 अन्य अज्ञात के खिलाफ धारा 188, 269, 270 सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। गिरफ्तार किए गए सभी लोगों को जेल भेज दिया है। 

एसपी (देहात) विद्यासागर मिश्रा ने बताया कि जिले में सभी को यह आगाह किया गया है कि कोई भी सामूहिक रूप से मस्जिद में नमाज नहीं पड़ेगा, क्योंकि इससे लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का उल्लंघन होता है। सोशल डिस्टेंसिंग न होने से कोरोना वायरस फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है। चेतावनी के बावजूद एक मस्जिद में सामूहिक नमाज हो रही थी, जो लोग पुलिस को देख भाग निकले उनकी पहचान कराई जा रही है।

इससे पहले भी गुरुवार को असम के लखीमपुर जिले के दक्खिन पंडोवा गाँव की एक मस्जिद में कुछ लोग लॉकडाउन का उल्लंघन कर नमाज अदा करने के लिए एकत्र हो गए थे। इसकी जानकारी मिलने पर जब पुलिस टीम मौके पर पहुँची तो उसमें मस्जिद में 12 लोगों को पाया। इसके बाद जैसे ही पुलिस की टीम मस्जिद से निकली उस पर पथराव शुरू हो गया।

इसमें ग्राम प्रधान सहित चार पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। वहीं पथराव में पुलिस का वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गया था। इस मामले में पुलिस ने इमाम सहित 12 लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
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May 1, 2020

हैदराबाद-AIMIM नेता मोहम्मद मुर्तजा अली ने मस्जिद के बाहर ड्यूटी कर रहे पुलिस को धमकाया, केस दर्ज

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हैदराबाद पुलिस ने AIMIM के कॉरपोरेटर मुर्तजा अली के खिलाफ मामला दर्ज किया है। मुर्तजा अली को एक वायरल वीडियो में बृहस्पतिवार को हैदराबाद के चवन्नी नदी अली बेग में एक मस्जिद के पास अपनी ड्यूटी कर रहे दो कॉन्स्टेबल को धमकाने और ड्यूटी में बाधा डालते हुए देखा गया था।

हैदराबाद पुलिस ने AIMIM पार्टी के कॉरपोरेटर मुर्तजा अली के खिलाफ मामला दर्ज किया है। मुर्तजा अली को एक वायरल वीडियो में बृहस्पतिवार (अप्रैल 30, 2020) को हैदराबाद के चवन्नी नदी अली बेग में एक मस्जिद के पास अपनी ड्यूटी कर रहे दो कॉन्स्टेबल को धमकाने और ड्यूटी में बाधा डालते हुए देखा गया था।

हैदराबाद के मदन्नपेट एरिया में एआईएमआईएम (AIMIM) के कॉरपोरेटर मोहम्मद मुर्तजा अली खुलेआम दो पुलिस कॉन्सटेबल को धमकी देते हुए नजर आ रहे थे। इन दोनों कॉन्सेबल्स की ड्यूटी कल शाम को इफ्तार के समय लगी हुई थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, मदन्नपेट के SHO संतोष कुमार ने से इस खबर की पुष्टि की और कहा कि देशव्यापी लॉकडाउन के कारण सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए पुलिस कॉन्टेबल्स ने मस्जिद में अंदर जाने वाले लोगों से कहा था कि 5 लोगों से ज्यादा लोगों को अंदर जाने की अनुमति नहीं है। उस दौरान करीब 10 लोग अंदर थे, जिस पर कॉन्सटेबल्स ने आपत्ति जताई थी।


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इसके बावजूद AIMIM के कॉरपोरेटर मोहम्मद मुर्तजा अली ने खुलेआम कॉन्सटेबल्स को धमकी दी और उन्हें वहाँ से जाने के लिए कहा। माहौल को देखते हुए दोनों कॉन्सटेबल वहाँ से लौट गए।

SHO संतोष कुमार ने कहा कि उन्होंने दोनों पुलिस वालों को सुबह बयान देने के लिए बुलाया है और FIR दर्ज की जा रही है।

एसवीएन शिवराम शर्मा, एसीपी संतोषनगर ने कहा कि पुलिस कॉन्स्टेबल द्वारा शिकायत दर्ज की गई है और मुर्तुजा अली के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पहले भी धमकी और हमले की ऐसी कई घटनाएँ देश के कई हिस्सों में सामने आ चुकी हैं।

बता दें कि इससे पहले हैदराबाद में ही इलाज के दौरान नर्सों से दुर्व्यहार की खबर भी आई थी जहाँ तबलीगी जमाती कभी इन्हें हाथ लगाने की कोशिश करते हैं तो कभी इनको देखकर सीटी बजाते हैं, जन्नत दिखाने की बात कहते हैं। इसके अलावा भी कई अन्य तरीके से ये जमाती इनके साथ अभद्रता कर रहे थे।

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April 30, 2020

महाराष्ट्र-पालघर में संतों की ह्त्या पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार, DGP और CBI को भेजा नोटिस

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महाराष्ट्र: बीते दिनों महाराष्ट्र के पालघर में दो संतों की पुलिस के सामनें पीट-पीटकर ह्त्या कर दी गई थी। इस मामलें में अब कोर्ट ने संज्ञान लिया है। वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर इस मामलें की जांच सीबीआई से कराने की अपील की थी।

वकील अलख आलोक श्रीवास्तव की याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार, डीजीपी और सीबीआई को नोटिस भेजकर 2 हफ्ते के अंदर जवाब माँगा है। साधुओं और उनके ड्राइवर की हत्या की CBI या SIT जांच की मांग पर बॉम्बे हाईकोर्ट 22 मई को सुनवाई करेगा।

गौरतलब है की पालघर में पुलिस के सामनें दो संतो और उनके ड्राइवर की उन्मादी भीड़ वारा पीट-पीटकर बेरहमी से ह्त्या कर दी गयी थी। इस घटना को दबाने के लिए भरसक प्रयास किये गए। 3 दिन तक सफल भी रहे। लेकिन घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद महाराष्ट्र की उद्धव सरकार पर दबाव बढ़ने लगा।

इसके बाद सरकार ने 110 लोगों को हिरासत में लिया। सरकार की ओर से दावा किया गया की, इन सब से घटना के बारे में पूछताछ की जा रही है। वहीँ कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है की आरोपियों से पूछताछ नहीं बल्कि उन्हें हिरासत में बिरयानी खिलाई जा रही है।
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April 29, 2020

कोरोना: प्लाज्मा थेरेपी को ICMR ने बताया खतरनाक

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प्लाज्मा डोनेट करते हुए एक तबलीगी की तस्वीर को आधार बनाकर बहस का मुद्दा यह बना दिया गया कि मुस्लिम भी कोरोना वायरस के इलाज के लिए आगे आ रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि जो लोग आज तक यह स्वीकार करने में कतराते रहे कि देश में कोरोना वायरस के संक्रमण का सबसे बड़ा स्रोत तबलीगी जमात रहा है, वह भी इस बात पर गद्य लिखते नजर आने लगे।

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प्लाज़्मा थेरेपी से कोरोना वायरस (COVID-19) के उपचार की बात पर स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा है कि यह थेरेपी अभी तक साबित नहीं हुई है और अभी सिर्फ प्रायोगिक चरण में ही है। इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि कोरोना वायरस के उपचार में यदि प्लाज्मा थेरेपी का प्रयोग दिशानिर्देशों के अनुसार नहीं हुआ तो यह जान के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है।

जानलेवा हो सकता है प्लाज्मा थेरेपी का उपयोग – ICMR
स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय के संयुक्‍त सचिव लव अग्रवाल ने कहा – “आइसीएमआर (ICMR) द्वारा प्लाज्मा थेरेपी का प्रयोग किया जा रहा है। हालाँकि, इस बात का कोई सबूत नहीं है कि इसे उपचार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके प्रभाव का अध्ययन करने के लिए आइसीएमआर (ICMR) द्वारा राष्ट्रीय स्तर का अध्ययन शुरू किया गया है। जब तक आइसीएमआर (ICMR) अपने अध्ययन का समापन नहीं करता है और एक मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं होता है, तब तक प्लाज्मा थेरेपी का उपयोग केवल अनुसंधान या परीक्षण के उद्देश्य के लिए किया जाना चाहिए। यदि उचित दिशा-निर्देश के तहत प्लाज्मा थेरेपी का सही तरीके से उपयोग नहीं किया जाता है तो यह जीवन के लिए खतरा भी पैदा कर सकता है।”


Currently, there are no approved, definitive therapies for #COVID19. Convalescent plasma is one of the several emerging therapies. However, there is no robust evidence to support it for routine therapy. has also viewed it as an experimental therapy (IND). 1/4
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इसके साथ ही आइसीएमआर ने यह भी सुझाव दिया है कि प्लाज्मा थेरेपी के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण का महत्त्व आवश्यक है। दरअसल, सार्स-सीओवी (SARS-CoV), एच1एन1(H1N1) और मर्स सीओवी (MERS-CoV) जैसे खतरनाक वायरस के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल किया गया था।
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भारत में भी कोरोना वायरस का पहला प्लाज्मा परीक्षण (Plasma for Corona Treatment) देश में सफल रहा है। 

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लेकिन इसके बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा यह जानकारी भी दी गई कि यह थेरेपी अभी सिर्फ और सिर्फ ट्रायल और टेस्टिंग के लिए ही अप्रूव हुई है और इसका इलाज के लिए प्रयोग खतरनाक हो सकता है।

प्लाज़्मा थेरेपी पर लिबरल मीडिया गिरोह की रूचि
प्लाज़्मा थेरेपी के चर्चा में आते ही अचानक से ‘सेक्युलर’ राजनेता और ‘वाम-उदारवादी’ लिबरल गिरोह सक्रीय हो उठे। प्लाज्मा डोनेट करते हुए एक तबलीगी की तस्वीर को आधार बनाकर बहस का मुद्दा यह बना दिया गया कि मुस्लिम भी कोरोना वायरस के इलाज के लिए आगे आ रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि जो लोग आज तक यह स्वीकार करने में कतराते रहे कि देश में कोरोना वायरस के संक्रमण का सबसे बड़ा स्रोत तबलीगी जमात रहा है, वह भी इस बात पर गद्य लिखते नजर आने लगे।

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मीडिया के वाम-उदारवादी वर्ग ने तबलीगियों की एक तस्वीर को इतना भुनाने का प्रयास किया कि यदि प्लाज्मा पर ICMR का स्पष्टीकरण न आता तो शायद अब तक प्लाज़्मा को सेक्युलर साबित कर दिया गया होता। इस वर्ग ने प्रलाप कर के ‘तबलीगी जमात’ के बदले ‘सिंगल सोर्स’ लिखने पर मजबूर किया।

हिन्दू-मुस्लिम मुद्दों को भुनाकर आज दिल्ली की सत्ता पर बैठे अरविन्द केजरीवाल ने भी फ़ौरन प्लाज्मा को गंगा-जमुनी तहजीब की ही अगली योजना साबित करने का प्रयास करते हुए बयान दिया कि हिंदू का प्लाज्मा मुस्लिम और मुस्लिम का प्लाज्मा हिंदू की जान बचा सकता है।


उल्लेखनीय है कि तबलीगी जमात का तांडव महीने भर से ही पहले से जारी है, बावजूद इसके किसी भी नेता और सेक्युलर मीडिया ने यह हिम्मत नहीं जुटाई कि वह मुस्लिमों की हरकतों पर खुलकर कह सके। इस देश के बुद्धिजीवी वर्ग के हालात यह हैं कि उन्हें यह कहने में रत्ती भर भी संकोच नहीं हुआ कि उन्हें यह साबित करने का प्रयास करना पड़ रहा है कि मुस्लिम भी चाहते हैं कि कोरोना ठीक हो जाए।

वास्तव में यह तो स्पष्ट सन्देश है कि मुस्लिम यदि कुछ सकारात्मक पहल करते हैं तो यह उनकी तरफ से समाज पर उपकार माना जाने लगा है। वरना मुस्लिमों के अलावा शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जिसने निरंतर शासन और व्यवस्था के साथ तालमेल बनाने के बजाए उन्हें बदतर बनाने की कोशिश की हो।

उदाहरण के तौर पर यदि तबलीगी जमात को ही लिया जाए तो 2002 में कारसेवकों को साबरमती एक्सप्रेस में जिन्दा जलाने से लेकर अलकायदा के हर दूसरे आतंकी अभियान में मौजूद यह संगठन इस बार भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के बड़े हिस्से में कोरोना का प्रमुख स्रोत बनता गया। प्लाज़्मा थेरेपी में मुस्लिमों की एक तस्वीर से मीडिया का जो वर्ग बवाल काट रहा है उसमें आज तक इतना भी दम विकसित नहीं हो सका है कि वह इन सभी मुद्दों पर चर्चा भी कर सके।


अच्छे मुस्लिम-बुरे मुस्लिम
देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर के लोगों ने अच्छे और बुरे मुस्लिमों के मुद्दे पर जमकर साहित्य लिखा है। एक पीढ़ी ने जहाँ अब्दुल कलाम के नाम पर मुस्लिमों के गुनाहों को ढकने की कोशिश कर दी वहीं दूसरी पीढ़ी भी एक ऐसे मुस्लिम को तलाश रही है जिसके आधार पर वो अगली दो-तीन पीढ़ियाँ काट दें। इस बीच सभी जानते हैं कि इन गिने-चुने नामों को छोड़कर बाकी के 99.99% मुस्लिम क्या कर रहे होंगे।


यह ऐसे ही है जैसे एक ताजमहल की भव्यता को मिसाल बनाकर इसी लिबरल गिरोह की जमात ने नालंदा की बर्बादी को गायब कर दिया। इसी तरह मुस्लिमों की एक बिरियानी को इस तरह से पेश किया जाता रहा है जैसे भारतीय इसके बिना कुपोषण से मर रहे थे। कुछ समय पहले ही सबा नक़वी मुस्लिमों द्वारा समाज पर किए गए एहसानों को गिनाती हुई नजर आ रहीं थीं। हालाँकि, यह उन्हें महंगा ही पड़ा।

प्लाज्मा थेरेपी का प्रयोग होना एक बात है। यह भी हो सकता है कि यह प्रयोग आगे सफल भी हो या असफल भी, लेकिन तमाम लिबरल गिरोह की कवरेज की भाषा ऐसी है मानो कोरोना वायरस का एकमात्र समाधान यही है और वो भी इस समय सिर्फ तबलीगियों के पास है, जैसा कि दिखाया भी जा रहा है।

फिलहाल ICMR ने प्लाज़्मा थेरेपी की सार्वजानिक इस्तेमाल पर प्रतिबंध की बात कही है। तब तक कम से कम लिबरल गिरोह को इसे मुस्लिमों द्वारा मानवता पर किया गया उपकार साबित करने की जल्दबाजी से बचना चाहिए।


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